कपास की आधुनिक खेती करने की जानकारी Kapas ki aadhunik kheti karne ki jankari

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कपास की खेती लगभग सभी तरह की ज़मीन पर की जा सकती है फिर भी दोमट भूमि को कपास की खेती के लिए सबसे सर्वोत्तम माना गया है । बलुई ज़मीन , क्षारीय भूमि और कंकड़ से भरी हुई ज़मीन पर कपास की खेती नहीं की जा सकती है । 
 

भूमि की तैयारी करने समय सबसे पहले खेत की जुताई लगभग 25 cm गहरी करनी चाहिए । जरुरत के अनुसार दुबारा 2 से 3 बार देशी हल चला कर खेत की जुताई कर दें और फिर उसे  भुरभुरा कर के फिर से भूमि को समभूमि(flat) बना देना चाहिए ।

जलवायु - कपास की खेती में अच्छे जमाव के लिए minimum 16°C तक का temperature होना चाहिए। फसल के विकास के time लगभग 21 से 27°C तक का temperature और फसल के तैयार होने के time में 27 से 32 °C तक की temperature की अव्यश्कता पड़ती है ।

कपास की प्रजातियाँ - कपास की खेती में दो तरह की प्रजातियाँ होती है :-

देशी प्रजातियाँ – लोहित, आर. जी. 8, सी. ए. डी. 4 ।
अमेरिकन प्रजातियाँ – एच. एस. 6, एच 777, एफ 846, आर. एस. 2013 आदि ।

कपास का उत्पादन उसके प्रजातियों पर हीं depend करता है । देशी प्रजातियों वाली कपास जैसे की लोहित , आर. जी. 8, आदि की लगभग 15 क्विंटल per hectare उपज होती है वहीँ अमेरिकन प्रजातियों वाली कपास जैसे की एच 777, एफ 846 आदि की उपज लगभग 12 से 14 क्विंटल per hectare होती है ।

बीज बुआई का समय व विधि - कपास की बीज की बुआई उसके प्रजातियों पर निर्भर होता है । कपास की देशी प्रजातियों की बुआई starting april में और अमेरिकन प्रजातियों की बुआई mid of April से starting may तक की जाती है । बुआई के समय line से line का distance कम से कम 70 cm होनी चाहिए और पौधों से पौधों की distance कम से कम 30 cm होनी चाहिए । एक जगह पर केवल 3 से 4 बीजो को हीं बोना चाहिए। कपास की खेती में बीज बुआई की मात्रा इसके प्रजातियों के अनुसार डाली जाती है।

देशी प्रजातियों में 15 kg per hectare और अमेरिकन प्रजातियों में लगभग 20 kg per hectare की मात्रा पड़ती है ।

खाद प्रबंधन - कपास की खेती में खाद व उर्वरको का उपयोग मिट्टी की जाँच के आधार पर हीं की जाती है। अगर मिट्टी में कर्वानिक पदार्थो की कमी पाई जाती है तो खेत की last जुताई के time में हीं मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद को मिला देना चाहिए । गोबर की खाद के साथ खेत की last जुताई करने time लगभग 30 kg nitrogen, और 30 kg phosphorus का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उसके बाद दोबारा लगभग 30 kg nitrogen की मात्रा का इस्तेमाल पौधे में फूल आने के बाद 2 बार कर के करना चाहिए ।

क्यूंकि मौसम कभी भी change हो सकता है, इसलिए कपास के बिज को सोधे जमीन में ना बोये, इसके उलट इसके बिज को मेड़ो पर करे ताकि कपास के पौधे को नुकसान ना हो |

रोग व कीट नियंत्रण - कपास में लगने वाले रोग का नाम कुछ इस प्रकार से है :-

शाकाणु झुलसा रोग – इस रोग से बचने हेतु खड़ी फसल में बारिस शुरु होते हीं लगभग 1.25 g  कॉपरऑक्सीक्लोराइड, 50 प्रतिशत Soluble powder  और 50g Agri Maisin को per hectare की दर से लगभग 800 ltr पानी में mix कर के इसका दो बार छिड़काव हर 25 दिन के interval पर करना चाहिए ।

कपास में लगने वाले कीटो का नाम कुछ इस प्रकार से है :-

हरा फुदका कीट
सफ़ेद मक्खी माहू कीट
तेला कीट
थ्रिप्स कीट
गूलर भेदक

ऊपर दिए गए सभी कीटो पर नियंत्रण पाने के लिए किसी भी कीटनाशक का use किया जा सकता है । इसके अलावा कृषि वेज्ञानिको द्वारा दी गई सलाह के अनुसार भी आप इन कीटो पर नियंत्रण पा सकते है ।

फसल की चुनाई व उसका भंडारण - कपास के पौधे को लगभग 150 से 160 दिन लगते है पुरे बड़े होने में और कपास की फसल तैयार होने में | कपास की चुनाई प्रातः काल में ओस के हट जाने के बाद पूरी तरह से खीले हुए गुलारो से की जानी चाहिए । देशी प्रजातियों के कपास की चुनाई लगभग 10 days के interval में की जाती है और अमेरिकन प्रजातियों के कपास की चुनाई लगभग 20 days के interval में की जाती है । रोगों व कीटो से affected कपास की चुनाई अलग से की जानी चाहिए । कपास की चुनाई करते समय ध्यान रहे की कपास के साथ उसकी पत्तियां ना रहे ।

चुनी गई कपास का भंडारण करने से पूर्व उसे अच्छे से dry यानि की सुखा लेना चाहिए और फिर जिस कमरे में कपास का भंडारण करना है वो कमरा चूहों से मुक्त व पूरी तरह से dry होनी  चाहिए।

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