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केले की आधुनिक खेती करने की जानकारी Kele ki aadhunik kheti karne ki jankari

अगर आप केले (Banana) की खेती करने का सोच रहे है तो इस खेती के लिए वैज्ञानिक तकनीको को अपनाएं। केले की खेती से किसानो को काफी मुनाफा हो सकता है क्योंकी केला पका हो या फिर कच्चा बाज़ार में इन दोनों के अच्छे दाम मिल जाते है । केले के अच्छे उपज के लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना होता है जैसे की भूमि और मिट्टी का चयन , पौधे की सिंचाई, आदि । तो आइये हम जानते है  कैसे करे केले की खेती ।

जलवायु - केले की खेती में अच्छे उपज की प्राप्ति उसके जलवायु पर depend करता है । पश्चमी और उत्तरी भारत में केले के बिज रोपन का सही समय मानसून के शुरुआत में होता है जो की जून या जुलाई का महिना होता है।

भूमि का चयन व तैयारी - वैसे तो केले की खेती सभी प्रकार के मिट्टी पर की जा सकती है लेकिन दोमट मिट्टी जिसमे जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो तो उसे सबसे सर्वोतम माना जाता है । बीज रोपने से पहले मिट्टी पलटने वाली हल द्वारा भूमि की अच्छे से जुताई कर लेनी चाहिए साथ ही मांदा निर्माण कर के केले की खेती करने से अधिक उत्पादन होता है ।

बीज रोपन - बिज रोपने से पहले भूमि को गहरा जुताई कर के उसे भुरभुरा बना लेना चाहिए और फिर उस भूमि को ट्रेक्टर या पाटा द्वारा समतल बना देना चाहिए। जब खेत अच्छे से तैयार हो जाये तो फिर उसमे 50 cm लम्बा, 50 cm चौड़ा और 50 cm गहरा गड्ढा खोद लेना चाहिए । केले के रोपन के वक़्त ऊँची जाती के पौधों को 3 m और छोटे जातियों के पौधों को 2 m की दूरी पर रोपना चाहिए ।

सिंचाई प्रबंधन - केले के खेती में सिंचाई की अव्यश्कता भूमि और जलवायु पर निरभर करता है। अगर पौधे को  रोपने के बाद एक दो दिन के अन्दर वर्षा ना हो रही हो तो तुरंत सिंचाई कर देनी चाहिए । जाड़े के मौसम में लगभग 10 से 12 दिनों के अंतर में और गर्मी की समय लगभग 5 से 7 दिनों के अंतर में सिंचाई करनी चाहिए ।

खाद प्रबंधन - केले के खेती में अच्छे उपज के लिए कृषि वैज्ञानिको द्वारा बताए गए तरीको से खाद देनी चाहिए। पौधे को रोपने समय गड्ढे में गोबर (cow dung) की खाद 20 kg, nitrogen 100 gram, सल्फर (sulfur) 150 gram और पोटाश (potash) 150 gram देना चाहिए ।

रोग / किट पतंग - केले के पौधे को रोगों से बचाने के लिए थोड़ी सी सावधानी बरतनी पड़ती है । तना विविं और माहू ये दोनों केले के पौधे में लगने वाले कीटो के नाम है ।

केले के पौधों को प्रभावित करने वाले रोगो का नाम है :-
  1. पनामा रोग:- इस रोग से 50 प्रतिशत से अधिक फसल का नुकसान हो जाता है।
  2. बंची टॉप रोग
  3. पण चत्ति रोग
उपचार - केले के पौधों में लगने वाले इन रोगों और कीटो से बचने के लिए वैज्ञानिको की सलाह अनुसार फफूंदी नाशक दवाइयों का इस्तेमाल करनी चाहिए ।
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