लहसुन की खेती करने का वैज्ञानिक तरीका Lahsun ki kheti ka vaigyanik tarika

अब बात आती है की लहसुन की खेती कैसे किया जाय। आपको मैं बता दू की एक खेती पारंपरिक होती है। जिसे हम लगातार कई वर्षो से करते हुए आ रहे हैं। और एक होती है आधुनिक खेती या हम वैज्ञानिक खेती भी कह सकते हैं। वैज्ञानिक खेती में समय के साथ बदलाव हो रहा है जिसके कारण हमें खेती के नए - नए तरीको का ज्ञान प्राप्त होता है।

पारम्परिक खेती के मुकाबले वैज्ञानिक खेती उचित मानी जाती है और वैज्ञानिक खेती करने से उपज भी अच्छी होती है। हमारा ये पूरा प्रयास है की आपको लहसुन की वैज्ञानिक खेती के बारे में अच्छी तरह से जानकारी दें। आप निचे देखिये और जानिए लहसुन की वैज्ञानिक खेती कैसे की जाये।

लहसुन की खेती करने के लिए भूमि कैसी हो- जब हम लहसुन की खेती करने जाते हैं तो सबसे पहले उसकी भूमि के बारे में जानना बहुत जरुरी है। लहसुन के खेती के लिए दोमट मिट्टि जिससे जल (पानी) निकलने का प्रबन्ध अच्छा हो उसे बढ़िया माना जाता है। लहसुन की खेती करने से पहले मिट्टि की जुताई करके उसे भुरभुरा बना लेना चाहिए फिर उसे समतल बना लेना चाहिए। मिट्टी में से घास फूस खर पतवार को निकाल देना चाहिए। जहाँ तक हो सकेें उसमे इट पत्थर कंकर को भी निकाल कर फेक दें। प्लास्टिक तो बहुत ही हानिकारक है ये कभी गलती नहीं है। आप प्लास्टिक को जहा तक हो सके निकाल लें। क्योंकि प्लास्टिक खेत के लिए बहुत ही हानिकारक है।

लहसुन की खेती के लिए जलवायु- अब बात आती है जलवायु की लहसुन की खेती के लिए जलवायु कौन से उचित मानी जाती है। लहसुन की खेती करने के लिए ठंडी जलवायु उचित है। ठण्ड का दिन छोटा होने के कारण कन्द का उत्पादन बढ़िया होता है। लहसुन की खेती समुन्द्र तट से 1000-1400M की ऊँचाई पर की जा सकती है। लहसुन की खेती के लिए 30 से 35 डिग्री से. तक का तापमान और लगभग 10 घंटे तक के दिन को उचित माना जाता है।

लहसुन का बिज बोना- लहसुन के बीजो को खेत में बोने से पहले केरोसिन (KEROSENE) से उपचरित कर लेना चाहिए। लहसुन के बिज को बोने के लिए मिट्टी में 4 से 5 सेमी. की खुदाई कर लेनी चाहिये बिज को बोते समय इस बात पर ध्यान देना चाहिये की कतारों के बिच की दुरी लगभग 15 सेमी. हो और लहसुन के बिज से बिज की दुरी लगभग 8 सेमी. हो। बढ़िया उपज के लिए लहसुन को डबलिंग विधि द्वारा बोना उचित रहता है।

लहसुन के लिए खाद की व्यवस्था- लहसुन की वैज्ञानिक खेती तथा अधिक उत्पादन के लिए खाद प्रबन्ध 1 एकड के लिए- गोबर की खाद- 25 टन (TON) भू पॉवर - 50 की.ग्रा. (K.G.) माइक्रो फर्टिसिटी कम्पोस्ट - 40 की.ग्रा. (K.G.) माइक्रो भू पॉवर - 10 की.ग्रा. (K.G.) सुपर गोल्ड कैल्सीफ़र्ट - 10 की.ग्रा. (K.G.) अरण्डी की खली - 50 की.ग्रा. (K.G.) माइक्रो नीम - 20 की.ग्रा. (K.G.) 1 एकड़ के हिसाब से 25 टन गोबर की खाद को खेत में डाल दें। इसके बाद 50 कीग्रा भू पॉवर , 40 कीग्रा माइक्रो फर्टिसिटी , माइक्रो भू पॉवर 10 कीग्रा , सुपर गोल्ड कैल्सीफर्ट 10 कीग्रा , अरण्डी की खली 50 किग्रा , माइक्रो नीम 20 किग्रा एक साथ मिलाकर तैयार कर लें और इसे समान मात्रा में खेत में बिखेरकर खेत की जुताई कर दें और खेत को तैयार करके उसमें बिज की बुआई करें। बिज बोन के 25 दिन बाद उसमे 1 किग्रा सुपर गोल्ड मैनिसियम और 500 माइक्रो झाईम को 500 मिलीलीटर (ML) पानी में मिलाकर खेत में छिड़काव कर दें। ऐसा ही आप 18 से 22 दिनों के अंतराल पर दूसरा और तीसरा छिड़काव करें।

लहसुन के लिए सिंचाई- लहसुन की सिचाई बिज को बोने के तुरंत बाद कर देनी चाहिए क्योंकि लहसुन के फसल की वृद्धि के लिए भूमि में नमी का होना जरुरी है। उसके बाद हर 15 से 17 दिनों के अंतराल के बाद सिंचाई करें।

लहसुन के लिए खरपतवार नियंत्रण- लहसुन की बढ़िया उपज पाने के लिए खर पतवार को हटाना बहुत ही जरुरी है इसके लिए आप निराई गुड़ाई जरूर करें। पहली निराई गुड़ाई बिज बोन के 25 से 27 दिनों के बाद करें तथा दूसरी 50 से 55 दिनों के बाद करें। (ध्यान दें) NOTE- अगर आप बड़ी मात्रा में लहसुन की खेती करते हैं तो निराई गुड़ाई में काफी समय लग जायेगा इससे बचने के लिए आप लहसुन के बिज बोने के बाद उसे पुआल से ढक सकते हैं इससे घास खर पतवार नहीं जमेगा अगर जमेगा तो बहुत कम जिसे आप आसानी से हटा सकते हैं। और समय के साथ पुआल सड़ कर खाद बन जायेगा इससे भी फायदा होगा।

लहसुन में लगने वाले रोग और कीट एवम् उनका उपचार- लहसुन में कई प्रकार के रोग और किट लग जाते हैं उनके बारे में एवम् उनके उपचार के बारे में जानना बहुत जरुरी है। 1. बैंगनी धब्बा रोग- इस रोग के कारण लहसुन के पत्ते और तनो पर गुलाबी रंग के छोटे छोटे धब्बे पड़ जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए नीम का काढ़ा बनाकर माइक्रो झाईम् के साथ मिलाकर 250 मिलीलीटर (ML) पानी में घोलकर करके खेत में छिड़काव करना चाहिए। 2. स्टेमफिलियम ब्लाइट रोग- यह रोग नम WEATHER फफूंदी के कारण लगता है। इसके उपचार के लिए नीम का काढ़ा बनाकर माइक्रो झाईम् के साथ मिलाकर 250 मिलीलीटर (ML) पानी में घोलकर करके खेत में छिड़काव करना चाहिए। 3. थ्रिप्स कीट- ये दिखने में छोटे एवम् पीले रंग के होते हैं। ये पत्तियों का रस चूसकर उसपर सफेद धब्बा बना देते है। इनसे बचाव के लिए नीम का काढ़ा बनाकर माइक्रो झाईम् के साथ मिलाकर 250 मिलीलीटर (ML) पानी में घोलकर करके खेत में छिड़काव करना चाहिए।

लहसुन की खुदाई- अंत में लहसुन की खुदाई की जाती है। जब लहसुन का तैयार हो जाता है तो उसके पत्ते पिले होकर नस्ट हो जाते हैं। लहसुन के तैयार होने के बाद कंदो को पौधो सहित उखारकर 3 से 4 दिन तक धुप में सुखा देना चाहिए। अगर आप इन सब बातो को ध्यान में रखकर खेती करते हैं तो आप लाखो कमा सकते हैं। अगर पारम्परिक खेती के बजाय वैज्ञानिक खेती को किया जाय तो आपको कम ख़र्च पर अधिक पैसा मिल सकता है। अगर वैज्ञानिक खेती की जाए और भूमि फसल की अच्छी तरीके से देखभाल की जाय तो आपको प्रति हेक्टेयर 100 से 200 क्विंटल उपज मिल जाती है।

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