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परवल की खेती करने का आधुनिक तरीका Parwal ki kheti ka aadhunik tarika

परवल का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। परवल भारत में बहुत ही प्रचलित सब्जी है। आज के समय में किसान परवल की खेती करके काफी मुनाफा कमा रहे हैं आप भी परवल की खेती करके आसानी से हज़ारों लाखों कमा सकते हैं। बस आपके पास सही तरीकों का ज्ञान होना चाहिए आपको इस पोस्ट में परवल की खेती के तरीकें बताएं गए हैं तो आप इस पोस्ट को देखिये और जानिए परवल की खेती कैसे की जाती है।

साधारण तौर पर परवल की खेती वर्ष भर की जाती है। ये बिहार , पश्चिम बंगाल , पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य तौर पर उगाई जाती है और मध्य प्रदेश , गुजरात , आसाम और महारास्ट्र में भी ये कुछ बागानों में उगाई जाती है। परवल में बिटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसकी मांग भी बाजार में अधिक है इसलिए परवल की खेती करने का मतलब मुनाफा तो देखिये ये पूरी पोस्ट और जानिए की परवल की खेती कैसे करें। 

परवल की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु- परवल की खेती के लिए गर्म जलवायु अच्छी मानी जाती है। गर्म क्षेत्रों में परवल की खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त होता है। इसलिए परवल की खेती गर्म जलवायु में आसानी से की जा सकती है। ठंडे क्षेत्रों में इसको बहुत कम उगाया जाता है यानि ठंड वाले क्षेत्रों में इसकी खेती बहुत कम की जाती है। 

परवल की खेती के लिए भूमि का चयन- जलवायु के बाद भूमि का चयन आता है यानि परवल की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी अच्छी है- जहाँ तक परवल की खेती के लिए मिट्टी की बात है तो जिवांशयुक्त बलुई दोमट मिट्टी जिसमें की जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो उपयुक्त मानी जाती है। 

खेत की तैयारी- परवल की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करने बाद खर पतवार कंकर पत्थर निकाल कर फेक देना चाहिए खेत में प्लास्टिक भी ना रहे इस बात पर पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि प्लास्टिक खेत के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। जब खरपतवार कंकर पत्थर आदि को निकाल लिया जाये तो खेत की जुताई फिर से कर देनी चाहिए। आप जुताई का कार्य देशी हल या फिर कल्टिवेटर से कर सकते हैं। परवल की खेती मेढ़ों पर ज्यादातर की जाती है अगर परवल की खेती मेढ़ों पर की जनि है तो वहां गड्ढे 1.5 या 2 मीटर लंबा और 1.5 या 2 मीटर चौड़ा होना चाहिए। और गड्ढे की गहराई 60 से 80 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। गड्ढे बनाते समय गोबर की खाद और अन्य खाद को मिला लेना चाहिए इसके बारे में आगे बताया गया है। परवल की खेती समतल भूमि पर भी की जा सकती है। इसलिए लिए पहले खेत को समतल बना लेना चाहिए। 

परवल की खेती के लिए खाद प्रबन्ध- परवल की खेती के खाद प्रति हेक्टेयर की दर से- 1.अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद- 200 से 250 क्विंटल 2.नत्रजन- 90 से 100 किग्रा. 3.फास्फोरस- 60 से 70 किग्रा. 4.पोटास-40 से 50 किग्रा. खेत की तैयारी के साथ अच्छी सड़ी गोबर की खाद को अच्छी तरह से मिला लेना चाहिए। उसके बाद नत्रजन 90 किग्रा. फास्फोरस 60 किग्रा. फास्फोरस और 40 किग्रा. पोटास को प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में देना चाहिए। फास्फोरस और पोटास की पूरी मात्रा तथा नत्रजन की आधी मात्रा खेत की तैयारी के साथ देना चाहिए बाकि बची हुई नत्रजन को पौधे में फूल आने के समय देना चाहिए। इसी तरह दूसरे वर्ष भी गोबर की खाद और नत्रजन पोटास और फास्फोरस आवश्यकता अनुसार पौधों में देना चाहिए। 

परवल में लगने वाले रोग और उनसे बचाव- परवल के पौधे पर कई प्रकार के किट रोग लग जाते हैं जिनका समय पर उपचार नहीं किया जाये तो परवल की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। किट रोगों से बचाव के लिए सबसे पहले तो दुषित पौधों को उखाड़ कर अलग कर देना चाहिए ताकि दूसरे पौधे उसकी चपेट में ना आये उसके बाद कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए परवल की उपज- परवल की उपज एक वर्ष में 80 से 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से होती है। पर ये बोने के तरीके पर निर्भर है। यदि अच्छे तारिके से पौधों का ध्यान रखा जाये तो लगभग 4 साल तक 140 से 180 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से उपज प्राप्त होती है।

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