टमाटर की खेती करने के वैज्ञानिक तरीके Tamatar ki kheti karne ka aadhunik tarika

टमाटर की आधुनिक खेती मतलब कम लागत पर अधिक मुनाफा। टमाटर की खेती वैज्ञानिक तरीके से करना बहुत ही आसान है वैज्ञानिक खेती में कुछ बातो का ध्यान देना पड़ता है जैसे- टमाटर की खेती के लिए सही मौसम टमाटर की खेती के लिए भूमि कैसी हो टमाटर की सिंचाई कैसे किया जाता है टमाटर की खेती के लिए खाद प्रबन्ध टमाटर को रोगों से बचाना आदि अब आप निचे पोस्ट को देखिये और जानिए टमाटर की आधुनिक खेती या वैज्ञानिक खेती कैसे करें

टमाटर की खेती- टमाटर अत्यन्त लोकप्रिय फलदार सब्जी है। भारत में इसकी खेती व्यापारिक तौर पर की जाती है। टमाटर में आयरन , फास्फोरस , बिटामिन A तथा बिटामिन C पाया जाता है। टमाटर का उपयोग सॉस , सुप , चटनी , पेस्ट आदि को बनाने में किया जाता है। टमाटर की सबसे खास बात ये है की टमाटर अनेक रोगों से लड़ने में सहायक है। टमाटर प्राकृतिक अम्लों से भरे होने के कारण हमारे पाचन तंत्र के लिए अत्यंत ही लाभदायक है। टमाटर रक्त शोधन , अस्थमा , पित्त विकारों आदि में लाभदायक है। यह सुष्क यकृत को उत्तेजित कर पाचक रसों के स्रावण में सहायक है। और इसी प्रकार से कई गुण होने के कारण यह हमारे शरीर को फायदा फायदेमन्द है। टमाटर की मांग बाजार में बहुत ज्यादा है इसलिए किसान टमाटर की खेती करके आज हजारों लाखों कमा रहे हैं। 

टमाटर की खेती के लिए जलवायु- टमाटर की खेती के लिए मध्यम ठंडा वातावरण उपयुक्त माना जाता है। तापक्रम के कम हो जाने से या पाले से पौधे खराब हो जाते हैं। गर्मी के अधिक हो जाने से पौधे मुरझा जाते हैं। टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए 20℃ से 23℃ का तापक्रम उचित रहता है।

टमाटर के लिए भूमि का चयन- टमाटर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। पर टमाटर की खेती जल निकासी वाली किसी भी भूमि पर कर सकते हैं। पीएच मान 6 से 7 होना उचित है।

टमाटर के लिए खेत की तैयारी- सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करके उसमे से कंकर पत्थर , घास फुस खरपतवार प्लास्टिक आदि को निकाल लेना चाहिए उसके बाद खेत की तैयारी करनी चाहिए। टमाटर के खेत को दो तरह से तैयार किया जा सकता है- 1. सीधी समतल 2. क्यारियां बनाकर जहाँ तक हो सके टमाटर की खेती क्यारियां बनाकर ही करनी चाहिए इससे खरपतवार उगने की सम्भावना कम रहती है। और टमाटर क्यारियों पर लगे होते हैं जिसके कारण सड़ते भी नहीं हैं। और इसमें पानी भी आसानी से दिया जा सकता है ताकि टमाटर के पौधों को कोई नुकशान न हो।

टमाटर की खेती के लिए खाद प्रबन्ध- प्रति हेक्टेयर के हिसाब से- गोबर की खाद- 200 से 250 क्विंटल नत्रजन (NITROGEN)- 100 किग्रा. पोटास (POTASH)- 50 किग्रा. फास्फोरस (PHOSPHORS)- 50 किग्रा. सबसे पहले गोबर की खाद 200 क्विंटल को खेत की तैयारी करते समय अच्छे से मिला देना चाहिए। फिर पौधा रोपण से पहले पोटास और फास्फोरस की पूरी मात्रा और नत्रजन की आधी मात्रा को खेत में मिला देना चाहिए बाकि बची हुई आधी नत्रजन तिन भागों में देना चाहिए पहला पौधा रोपण के 1 सप्ताह बाद दूसरा पौधा रोपण के 1 महीने बाद तथा तीसरा पौधा रोपण के 2 माह बाद। उर्वरक देने के बाद टमाटर के खेत के हल्की सिंचाई भी कर देनी चाहिए। अगर आप टमाटर की जैविक खेती के बारे में सोच रहे हैं तो इससे आपको बहुत फायदा होगा जिससे उत्पादन लागत बहुत ही कम आएगी इसके लिए आपको अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद को अच्छी तरह से खेत में टमाटर को लगाने से 4 दिन पहले मिलाना होगा उसके बाद टमाटर के पौधे को लगा दें।

बीज की तैयारी- टमाटर के लिए पौधों को तैयार करना बहुत ही आसान है आप 150 से 180 ग्राम हाइब्रिड (HYBRID) बिज प्रति हेक्टेयर लिए ले सकते हैं। बिज को बोने के बाद धुप से बचाव के लिए आप घास , पुआल , या चटाई से ढक सकते हैं। बिज को कतारों में बोना चाहिए वर्षा ऋतू में बिज को 10 सेमी. उची क्यारी तैयार करके बोना चाहिए।

टमाटर के पौधों को लगाना- जब क्यारियों में बोये गए बीज 30 से 35 दिनों के हो जाये या 8 से 10 सेमी. के हो जाये तो उन्हें खेत में रोपना चाहिए। रोपने के तुरन्त बाद उसमे हल्का हल्का पानी दे देना चाहिए। पानी देने का काम आप मग से भी कर सकते हैं। पानी 3 से 4 दिन तक लगातार सुबह (प्रातः काल) या साम के समय देना चाहिए ताकि पौधे मिट्टी में अच्छी तरह से लग जाएँ। 

टमाटर के पौधों की सिंचाईं- टमाटर के पौधों को लगाने के बाद सिंचाई पर विषेस ध्यान देना पड़ता है क्योंकि टमाटर के पौधों में अधिक पानी का देना या कम पानी का देना दोनों ही हानिकारक होता है। टमाटर के पौधों की सिंचाई ठण्ड के मौसम में 10 से 15 दिनों के अंतर पर करना चाहिए। तथा गर्मी के समय 4 से 5 दिन के अंतर पर सिंचाई करनी चाहिए। सिंचाई ऐसी करनी चाहिए की टमाटर के तने पानी में न डूबे क्योंकि टमाटर का पौधा बहुत मुलायम होता है। अगर तना पानी में डूब जाता है तो टमाटर के पौधे की सड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है। अगर क्यारियों में टमाटर लगाये गए हो तो तने की डूबने की सम्भावना कम रहती है या तने डुबते नहीं हैं। इससे पौधों को पानी मई पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। जहाँ तक हो सके टमाटर के पौधों की रोपाई क्यारियां बनाकर ही करनी चाहिए।

टमाटर में लगने वाले किट/रोग और उनसे बचाव- टमाटर में कई प्रकार के किट/रोग लगते हैं इसलिए उनका उपचार समय रहते ही करना बेहतर है.
  1. टमाटर में एक रोग LEAF CURS (पत्ते का मरोड़ना) लग जाता है। इस बीमारी के कारण टमाटर के पौधे की पत्तियां मुड़ने लगती हैं। अगर ऐसा कुछ पौधे में दिखे तो समझ जाएँ की LEAF CURS बीमारी पौधे में लग गई है। इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे पहले तो टमाटर के उन पौधों को खेत से उखाड़ कर फेक दें ताकि ये बीमारी किसी अन्य पौधे में ना लगे और lmidacloprid को लेकर 1 लीटर पानी में 6 ग्राम मात्रा को मिलाकर पुरे खेत में छिड़काव कर दें।
  2. टमाटर में एक बीमारी के कारण पौधे मुरझाने लगते हैं या सुख जाते हैं। अगर आपको टमाटर के पौधे में इस तरह की कोई बीमारी दिखे तो इसके उपचार के लिए 1 लीटर पानी में 2 ग्राम बोवास्तिन को मिलाकर टमाटर के पौधे के जड़ के समीप पानी डालें और पौधे के ऊपर छिड़काव करें।
  3. टमाटर में अर्धपतन बीमारी के कारण मिट्टी और टमाटर में फफूंद लग जाते हैं। इस प्रकार की बीमारी खासकर ठण्ड के मौसम में होती है। इस बीमारी के कारण टमाटर की उत्पादन क्षमता बेहद कम हो जाती है। इसका कारण है की ये बहुत तेजी से फैलती है और कई पौधे इसकी चपेट में आ जाते हैं। इस बीमारी से बचाव के लिए 1 लीटर FORMALDEHYDE को 50 लीटर पानी में मिलाकर टमाटर के पौधों को लगाने से पहले खेत में अच्छे तरीके से छिड़काव करना चाहिए। ताकि यह खेत में 8 से 10 सेंटीमीटर तक पहुच जाये। उसके बाद प्लास्टिक के चादर से 2 या 3 दिनों तक ढक कर छोड़ देना चाहिए। फिर खेत की अच्छी तरह से जुताई करके या मिट्टी को अच्छे से पलट करके 2 दिनों के लिए छोड़ देना चाहिए उसके बाद पौधे को लगाने का कार्य करना चाहिए। 
  4. टमाटर के हर 12 से 15 पौधे के बिच गेंदा का पौधा लगाने से टमाटर को कीटों से बचाया जा सकता है। क्योंकि टमाटर जैसे ही बड़े होने लगते हैं तो कई प्रकार के किट पतंग उन्हें नुकशान पहुचतें हैं। गेंदा के पौधे लगाने से कीटों के रोकथाम में आसानी होती है। जहाँ से आप टमाटर के पौधों की सिंचाई करते हैं वहां नालियों में भी गेंदें के पौधों को लगाया जा सकता है। नालियों में गेंदा के पौधों को लगाने से टमाटर में गेंदे की जड़ से निकला रस सिंचाई के समय चला जाता है जिससे निमेटोड के आक्रमण से भी बचा जा सकता है। क्योंकि निमेटोड के अचानक आक्रमण से टमाटर के पौधे सूखने लगते हैं।
  5. टमाटर में फलों का फटना भी कभी कभी समस्या के रूप में हमारे सामने आती है इसके उपचार के लिए 0.3% बोरेक्स का छिड़काव करना चाहिए या 0.3% कैल्सियम सल्फेट और मैग्नीशियम सल्फेट के घोल का छिड़काव करना चाहिए इससे टमाटर का फटना कम किया जा सकता है।
  6. वर्षा के मौसम में अधिकतर टमाटर के पौधे सड़ने लगते हैं इससे अच्छा भण्डारण नहीं हो पता इससे बचाव के लिए टमाटर के पौधे को लकड़ी की सहायता से चढ़ा देना चाहिए इससे पौधे सड़ने से बच जाता है।
टमाटर के फलों की तुड़ाई- सबसे अंत में टमाटर के फलों की तुड़ाई का कार्य किया जाता है। जब टमाटर के फलों का रंग हरे से लाल या पिला होने लगे तो टमाटर के फलों को तोड़ लेना चाहिए।

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