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बैगन की आधुनिक खेती करने की जानकारी Baingan ki aadhunik kheti karne ki jankari

बैगन के लिए उचित जलवायु बरसात होती है, जिसको समशीतोष्ण कहेगे, यह हर तरह के उपजाऊ भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट मिट्टी सर्वोतम होती है। लम्बे बैंगन की प्रजातियाँ जैसे की आजाद क्रांति, पूसा पर्पिल लांग, पूसा क्रांति और अब दूसरी तरह की आती है - गोल फल वाली प्रजातियाँ आजाद बी-1, कल्यानपुर टाइप-3 और पन्त ऋतुराज, कुछ संकर प्रजातियाँ जैसे आजाद हाइब्रिड, पूसा हाइब्रिड-5, पूसा हाइब्रिड-6, सुप्रिया, अर्का नवनीत एवं सुफल, इन प्रजातियों में से आप किसी एक प्रजाति का प्रयोग कर सकते है, जिससे आपको भरपूर पैदावार मिलेगी।

बीज की मात्रा - इसके लिए 500-600 ग्राम /हेक्टेअर के हिसाब से बीज पड़ता है।

सिचाई - जब आप पौध डालते है जून या जुलाई में सिचाई की आवश्यकता होती है क्योकि बरसात उस समय नहीं होती है। जब पौध की रोपाई कर देते है, खेत में फसल तैयार होकर चलने लगती है, उस समय यदि बरसात नहीं होती है तो आवश्यकता अनुसार आपको सिचाई करनी पड़ेगी लेकिन इसके साथ साथ जब हमारा अक्टूबर- नवम्बर से आगे जाता है, जब बरसात ख़तम हो जाती है तो आवश्यकता अनुसार सिचाई लगातार करते रहना चाहिए अप्रैल तक जबतक आपको फल मिलते रहे।

खाद और उर्वरक - खेत तैयारी के समय 200-250 कुंतल सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद प्रयोग करना आवश्यक है, इसके साथ ही 100 किलोग्राम नत्रजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस, 80  किलोग्राम पोटाश तत्व के रूप में प्रयोग करना चाहिए, आधी नत्रजन की मात्रा खेत तैयारी के समय फास्फोरस तथा पोटाश की पूरी-पूरी मात्रा आखिरी जुताई में देते है शेष बची हुई नत्रजन की मात्रा दो बार में देते है , एक तो 1/4 वह मात्रा 30-35 दिन की फसल पर शेष मात्रा जब हमारी फसल में फल आना शुरू हो जाते है तब देते हैं।

खरपतवार पर नियत्रण - खेत में रोपाई से पहले खेत की आखिरी जुताई पर वासालीन 48 ई. सी. 1.5 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करनी चाहिए जिससे खरपतवार कम उग सके, लेकिन इसके बाद भी यदि खरपतवार बरसात में उत्पन्न होते है, तो इसके लिए 2-3 निराई गुडाई करना अति आवश्यक है।

रोग का नियत्रण - बुवाई करने से पहले बीज शोधन कर लेना चाहिए, इसका उपचार थिरम 2.5 ग्राम/ किलोग्राम बीज की दर से मिलकर बुवाई करना चाहिए, लेकिन खड़ी फसल में कुछ रोग आते है, इसके लिए हम उन पोधो को उखाड़ कर जला देना चाहिए, इसके अलावा बैगन में 250 मिली लीटर फास्फोमिडान 800-1000 लीटर पानी में घॊल कर 8-10 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करते रहना चाहिए।

कीट का नियत्रण - बैगन में तन बेधक और फल बेधक दोनों  ही कीट लगते है, इसके बचाव के लिए कर्बोसल्फान 25 ई. सी. 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 800-1000 लीटर पानी में घॊल कर प्रत्येक 10-15 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करते रहना चाहिए।

तोड़ाई का समय - फूल आने के एक सप्ताह बाद तोड़ाई करना अति आवश्यक होता है।

उपज / हेक्टेयर - आप सामान्य जातियों का उपयोग कर रहे है, तो उन का 250-300 कुंतल आपको पैदावार मिलेगी लिकिन संकर प्रजातियों का 500-600 कुंतल पैदावार मिलती है।

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