Header Ads

Breaking News

Ads

अध्यात्मिक गुरू ओशो के अनमोल वचन Osho ke anmol vichar hindi me padhen

प्रिय दोस्त यदि आप अध्यात्मिक गुरू ओशो के अनमोल वचन पढ़ने के लिए इन्टरनेट पर सर्च कर रहें है तो अब आपको और किसी वेबसाइट पर जाने की जरुरत नहीं है क्योंकि हमने आपकी इस सर्च को यहीं पर पूरा कर दिया है। अब आप इस ब्लॉग पर ही ओशो के अनमोल विचार पढ़ सकते है।
ओशो को रजनीश चंद्र मोहन के नाम से भी जाना जाता था। ये भारत के अध्यात्मिक गुरूओं में से एक थे।


ओशो के अनमोल विचार :-

  • केवल वो लोग जो कुछ भी नहीं बनने के लिए तैयार हैं प्रेम कर सकते हैं.
  • यहाँ कोई भी आपका सपना पूरा करने के लिए नहीं है. हर कोई अपनी तकदीर और अपनी हक़ीकत बनाने में लगा है.
  • अगर आप सच देखना चाहते हैं तो ना सहमती और ना असहमति में राय रखिये.
  • कोई चुनाव मत करिए. जीवन को ऐसे अपनाइए जैसे वो अपनी समग्रता में है.
  • जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है.
  • जीवन ठेहराव और गति के बीच का संतुलन है.
  • मूर्ख दूसरों पर हँसते हैं. बुद्धिमत्ता खुद पर.
  • उस तरह मत चलिए जिस तरह डर आपको चलाये. उस तरह चलिए जिस तरह प्रेम आपको चलाये. उस तरह चलिए जिस तरह ख़ुशी आपको चलाये.
  • किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है. आप स्वयं में जैसे हैं एकदम सही हैं. खुद को स्वीकारिये.
  • आप जितने लोगों को चाहें उतने लोगों को प्रेम कर सकते हैं- इसका ये मतलब नहीं है कि आप एक दिन दिवालिया हो जायेंगे, और कहेंगे,” अब मेरे पास प्रेम नहीं है”. जहाँ तक प्रेम का सवाल है आप दिवालिया नहीं हो सकते.
  • सवाल  ये नहीं है कि कितना सीखा जा सकता है…इसके उलट , सवाल ये है कि कितना भुलाया जा सकता है.
  • मित्रता शुद्धतम प्रेम है. ये प्रेम का सर्वोच्च रूप है जहाँ कुछ भी नहीं माँगा जाता , कोई शर्त नहीं होती , जहां बस देने में आनंद आता है.
  • कोई प्रबुद्ध कैसे बन सकता है? बन सकता है, क्योंकि वो प्रबुद्ध होता है- उसे बस इस तथ्य को पहचानना होता है.
  • यदि आप एक दर्पण बन सकते हैं तो आप एक ध्यानी बन सकते हैं. ध्यान दर्पण में देखने की कला है. और अब, आपके अन्दर कोई विचार नहीं चलता इसलिए कोई व्याकुलता नहीं होती.
  • जिस दिन आप ने सोच लिया कि आपने ज्ञान पा लिया है, आपकी मृत्यु हो जाती है- क्योंकि अब ना कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज. अब आप एक मृत जीवन जियेंगे.
  • आत्मज्ञान एक समझ है कि यही सबकुछ है, यही बिलकुल सही है , बस  यही है. आत्मज्ञान कोई उप्लाब्धि नही है, यह ये जानना है कि ना कुछ पाना है और ना कहीं जाना है.
  • जैन एकमात्र धर्म है जो एकाएक आत्मज्ञान सीखता है. इसका कहना है कि आत्मज्ञान में समय नहीं लगता, ये बस कुछ ही क्षणों में हो सकता है.
  • अर्थ मनुष्य द्वारा बनाये गए हैं . और चूँकि आप लगातार अर्थ जानने में लगे रहते हैं , इसलिए आप अर्थहीन महसूस करने लगते हैं.
  • जब मैं कहता हूँ कि आप देवी-देवता हैं तो मेरा मतलब होता है कि आप में अनंत संभावनाएं है , आपकी क्षमताएं अनंत हैं.
  • आप वो बन जाते हैं जो आप सोचते हैं कि आप हैं.