तोरिया की आधुनिक खेती करने की जानकारी Toriya ki aadhunik kheti karne ki jankari

अक्तूबर 02, 2016
तोरिया (तोडिया) खरीफ एवं रबी के बीच शीघ्र प्राप्त होने वाली तिलहनी फसलो में आती है। इसकी खेती सीमित सिंचाई की दशा में अधिक लाभदायक होती है। उन्नत विधिया अपनाने पर उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। तोरिया की फसल के लिए 25 डिग्री सेंटीग्रेट से 30 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की आवश्यकता होती है।

तोरिया की फसल के लिए दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है जिसमे जल निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए।

किस्में - तोरिया की फसल के लिए उन्नतशील प्रजातियों का चयन करना चाहिए जैसे की टाइप 9, भवानी, पी.टी.303 तथा पी.टी.30 की बुवाई समय पर करनी चाहिए।

खेत की तैयारी - तोरिया की फसल की बुवाई से पहले खेत की तैयारी में सबसे पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो-तीन जुताइयां देशी हल या कल्टीवेटर से करके पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए।

बीज बुवाई - तोरिया की फसल को बीज जनित रोगो से बचाव के लिए बीज को 2.5 ग्राम थीरम नामक रसायन से प्रति किलोग्राम अथवा 3 ग्राम मेन्कोजेब नामक रसायन को प्रति किलोग्राम बीज में मिलाकर बीज उपचारित करने के बाद ही बीज की बुवाई करनी चाहिए।

बीज की मात्रा - तोरिया की फसल के लिए बीज की मात्रा 4 से 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करने के लिए उपयुक्त होती है।

बुवाई का समय - किसान भाइयो तोरिया की बुवाई सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह से सितम्बर माह के चौथे सप्ताह तक कर देना चाहिए फसल की बुवाई देशी हल से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर कतारों में करने के पश्चात पाटा लगाकर बीज को ढक देना चाहिए।

उर्वरक और खाद - तोरिया फसल की असिंचित दशा में बुवाई करने पर नाइट्रोजन 50 किलोग्राम, फास्फोरस 30 किलोग्राम तथा पोटाश 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए एवं सिंचित दशा में नाइट्रोजन 80 किलोग्राम, फास्फोरस 50 किलोग्राम तथा पोटाश 50 किलोग्राम तत्व के रूप में प्रयोग करना चाहिए। फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा अंतिम जुताई के समय बीज से 2 - 3 सेंटीमीटर नीचे प्रयोग करे तथा शेष आधी नाइट्रोजन की मात्रा को बुवाई के 20 से 25 दिन बाद टापड्रेसिंग के रूप में देना चाहिए।

सिंचाई - तोरिया की फसल में फूल निकलने से पूर्व की अवस्था जल की कमी के प्रति विशेष संवेदनशील फसल है अतः फसल की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए फूल निकलने से पूर्व एक सिंचाई करना अति आवश्यक है।

खरपतवार - किसान भाइयो तोरिया की बुवाई के 15 दिन बाद घने पौधों को निकालकर पौधों की आपस की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर कर देना चाहिए तथा खरपतवार नष्ट करने के लिए निराई गुड़ाई कर देना चाहिए। यदि खरपतवार अधिक है तो पेंडामेथलीन 30 ई.सी. नामक रसायन की 3.3 लीटर मात्रा को 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 12 से 36 घंटे के अंदर जमाव के पहले छिड़काव करना चाहिए।

रोग और नियंत्रण - तोरिया की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियो तथा फलियों पर कत्थई रंग के धब्बे बनाते है इनके उपचार के लिए मेन्कोजेब 75 % की 2 किलोग्राम मात्रा अथवा कापर आक्सीक्लोराइड 80% की 3 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए तथा फसल में सफ़ेद गेरुई रोग एवं तुलसिता रोग के नियंत्रण के लिए रोडोमिल एम्.जेड. 72 की 2.5 किलोग्राम मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।

कीट और नियंत्रण - किसान भाइयो तोरिया की फसल के प्रमुख कीट जैसे सरसों की आरा मक्खी, चित्रिल कीट तथा बालदार सूंडी प्रमुख कीट है जो तोरिया की फसल को हानि पहुचते है फसल को इन कीटो से बचाव के लिए मैलाथियान 50 ई.सी. रसायन की 1.5 लीटर मात्रा या फैंटोथियान 50 ई.सी. रसायन की 1 लीटर मात्रा या डायमिथोयेट 30 ई.सी.की 1 लीटर मात्रा को 700 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

फसल कटाई - तोरिया की फसल में जब 75 % फलियां सुनहरे रंग की हो जाये तो फसल की कटाई करके सुखाने के पश्चात मड़ाई करके बीज को अलग कर लेना चाहिए तथा बीज को अच्छी तरह सुखाकर ही भण्डारण करना चाहिए।

पैदावार - तकनीकी तरीके से उगाई गयी तोरिया की फसल से उपज 10 से 15 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है।  

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