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पागलपन के कारण लक्षण परहेज और इलाज Pagalpan ke karan lakshan parhej aur ilaz

खाना न खाना, नींद न आना और मानसिक भ्रम आदि रोगी व्यक्ति में उत्पन्न पागलपन के लक्षण हैं। दिमागी परेशानी के कारण यदि नींद न आती हो तो मानसिक पागल होता है,संभोग पूरी तरह से न कर पाने के कारण कामोन्माद और प्यार में असफल होने के कारण प्रेमोन्माद होता है।

इस रोग में रोगी की मानसिक स्थिति खराब हो जाती है जिससे वह अश्लील कार्य और अश्लील बातें करता रहता है। जब कभी भीतरी गर्मी प्रभाव अधिक होकर दिमाग पर पहुंचती है तो पागलपन का हल्का दौरा पड़ने लगता है। उस व्यक्ति को होश नहीं रहता है कि वह क्या कर रहा है। उसके मुंह से उल्टी-सीधी बातें निकलती रहती हैं। चेतना क्षीण होने लगती है और रोगी मानसिक पागलपन का शिकार होने लगता है।

कारण :

पागलपन का रोग मन, बुद्धि, दिल और दिमाग पर चोट लगने के कारण होता है। दूषित भोजन करना, विष अथवा विषैले पदार्थों का सेवन करना, दुश्मन के साथ अधिक दुश्मनी रखना, संभोग करने की इच्छा का बढ़ना, अधिक डर, दु:ख अथवा अधिक खुशी आदि कारणों से पागलपन उत्पन्न होता है। इसके अलावा मानसिक तनाव की अधिकता, अधिक चिन्ता और प्रेम में विश्वासघात का शिकार होने पर भी पागलपन उत्पन्न होता है। अधिक शराब, सिगरेट पीना, बुरे विचार रखना, अधिक मैथुन के द्वारा वीर्य नष्ट करना आदि कारणों से भी पागलपन का रोग होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण नहीं रहता है और बुद्धि नष्ट हो जाती है।

लक्षण :

पागलपन के रोग में रोगी की बुद्धि नष्ट होने के कारण वह भ्रमित रहता है, आंखे इधर-उधर घूमती है, सोचने की शक्ति खत्म हो जाती है, साहस नष्ट हो जाता है, वह हर समय डरा-डरा से रहता है, कुछ न कुछ बड़बड़ाता रहता है, बिना किसी कारण के हंसने व रोने लगता है। इसके अलावा अधिक बोलना, हाथ-पांवों को इधर-उधर फेकना, नाचना, गाना, निर्लज्जता, बिना वस्त्र पहने घूमना, क्रोध करना, निरन्तर पानी पीने की इच्छा, शरीर में पीलापन, मुंह से लार बहना, उल्टी होना, गन्दगी की पहचान न होना, मांस और शक्ति का खत्म होना आदि पागलपन रोग के लक्षण हैं।

भोजन और परहेज :

गेहूं, लाल चावल, दही, चिकने-मीठे और स्वादिष्ट भोजन, पुराना घी, परवल, आम, बथुआ, मीठे अंगूर, मीठे सेब, तरबूज, खरबूजा, बादाम की गिरी, बादाम का तेल और पालक आदि सभी चीजों को भोजन के रूप में खाया जा सकता है।

तेज नमक, मिर्च, अधिक तेल वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब का सेवन, गर्म भोजन, विरुद्ध भोजन, खीरा, ककड़ी, तरबूज, करेला और पत्तों के साग का सेवन पागलपन के रोग से पीड़ित रोगी को नहीं करना चाहिए।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. अनार : अनार के 15 ग्राम ताजे हरे पत्ते और 15 ग्राम गुलाब के ताजे फूलों को आधा लीटर पानी में उबालें और चौथाई पानी रहने पर छानकर 20 ग्राम देशी घी के साथ मिलाकर प्रतिदिन रोगी को पिलाएं। इससे पागलपन या उन्माद के दौरे दूर होते हैं।
अनार के 20 मिलीलीटर पत्तों के काढे़ में 10 ग्राम गाय का घी और 10 ग्राम चीनी मिलाकर पिलाने से मिर्गी के कारण उत्पन्न पागलपन में लाभ मिलता है।

2. अमरूद : 250 ग्राम अमरूद पर नींबू, कालीमिर्च और नमक डालकर खाने से दिमाग की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है और दिमाग की गर्मी निकलकर पागलपन दूर होता है।
सुबह खाली पेट पके अमरूद चबा-चबाकर खाने से मानसिक चिन्ता कम होकर धीरे-धीरे पागलपन के लक्षण दूर हो जाते हैं और शरीर की गर्मी निकल जाती है।

3. ब्राह्मी : ब्राह्मी का रस 6 मिलीलीटर, कूठ का चूर्ण लगभग 2 ग्राम और शहद 6 ग्राम मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पुराना मानसिक उन्माद समाप्त होता है।
ब्राह्मी 3 ग्राम, 2 कालीमिर्च, बादाम की गिरी 3 ग्राम, मगज के बीज 3 ग्राम और 3 ग्राम सफेद मिश्री को 25 गाम पानी में घोटकर छानकर सुबह पीने से मानसिक पागलपन दूर होता है।
ब्राह्मी 3 ग्राम और 2 कालीमिर्च को पानी में पीसकर दिन में 3-4 बार पीने से भूलने की बीमारी ठीक होती है।
ब्राह्मी एक किलो और 250 ग्राम मिश्री को मिलाकर चाशनी बनाकर 15 से 25 मिलीलीटर तक पानी के साथ दिन में 3 बार पीने से वात नाड़ियों की पुरानी बीमारियों में लाभ पहुंचाता है और पागलपन दूर होता है।
ब्राह्मी के रस में कूठ का चूर्ण तथा शहद मिलाकर चाटने से पागलपन शान्त होता है।
ब्राह्मी के पत्तों का रस तथा बालवच, कूठ, शंखपुष्पी को पीसकर गाय के साथ पुराने से घी के साथ सेवन करने से मानसिक उन्माद खत्म होता है।

4. अजवायन : आधा चम्मच अजवायन को चार मुनक्का के साथ पीसकर आधा कप पानी में घोलकर प्रतिदिन 2 बार लेने से पागलपन या उन्माद नष्ट हो जाता है।

5. सीताफल : सीताफल की जड़ का चूर्ण पागलपन में देना बेहद लाभकारी होता है।

6. अतीस : एक ग्राम अतीस के चूर्ण को 3-4 गुड़हल के फूलों के साथ पीसकर रस निकालकर सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ दिन सेवन कराने से रोग दूर होता है।

7. तुलसी : पागलनपन, जुकाम व निमोनियां में तुलसी के 15 पत्ते, 5 कालीमिर्च को पीसकर एक कप पानी में घोलकर प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मानसिक पागलपन दूर होता है।

8. चना : रात को लगभग 60 ग्राम चने को भिगोकर रख दें और सुबह इसमें चीनी मिलाकर एक गिलास भरकर पीने से पित्त की गर्मी के कारण उत्पन्न पागलपन दूर हो जाता है।
50 ग्राम चने की दाल को रात को 125 मिलीलीटर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह पीसकर इसका पानी छानकर चीनी मिलाकर रोगी को पिलाने से पागलपन का रोग दूर होता है।

9. कालीमिर्च : लगभग 12 कालीमिर्च और लगभग 3 ग्राम ब्राह्मी की पत्तियों को पीसकर आधे गिलास पानी में मिलाकर छानकर दिन में 2 बार रोगी को पिलाने से पागलपन दूर होता है।
कालीमिर्च, सफेद सरसों, छोटी पीपल, हल्दी, दारुहल्दी, हींग, मंजीठ और सिरस के बीज बराबर भाग में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बकरी के पेशाब में पीसकर रोगी को सुंघाने व आंखों में लगाने से उन्माद या पागलपन दूर होता है।
लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में कालीमिर्च, सोंठ, पीपल, हींग भुनी, बच और सेंधानमक को कूटकर इसका चूर्ण बना लें और छानकर गाय के पेशाब में पीसकर आंखों में लगाने से पागलपन दूर होता है।
लगभग 1 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम छोटी चांदड (चन्द्रभागा) को पीसकर आधा-आधा ग्राम सुबह-शाम गुलाबजल के साथ रोगी को देने से तेज पागलपन भी दूर हो जाता है।
कालीमिर्च के चूर्ण को घी में डालकर पीने से बादी के द्वारा होने वाला पागलपन नष्ट होता है।
लगभग 25-25 ग्राम की मात्रा में कालीमिर्च और धतूरे के बीजों को पीसकर पानी के साथ मिलाकर एक चौथाई ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1-1 गोली मक्खन के साथ खिलाने से पागलपन ठीक होता है।

10. तरबूज : एक कप तरबूज का रस, एक कप दूध और 30 ग्राम मिश्री को एक सफेद बोतल में भरकर रात को खुले चांदनी में किसी खूंटी से लटका दें। सुबह इस बोतल में जमा पानी भूखे पेट रोगी पिलाने से भ्रम के कारण हुआ पागलपन दूर होता है।
10 ग्राम तरबूज के बीजों की गिरी पानी में डालकर सुबह उन गिरियों को जल में पीसकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पिलाने से उन्माद या पागलपन ठीक हो जाता है।
वहम या पागलपन के रोगी को तरबूज का एक कप रस, एक कप गाय का दूध व मिश्री 30 ग्राम मिलाकर एक सफेद कॉच की बोतल में भरकर रात को खुले आकाश (चांदनी) में किसी खूंटे में बांधकर लटका दें और सुबह के समय रोगी को पिला दें। इस प्रयोग को लगातार 21 दिन तक करते रहने से पागलपन व वहम दूर हो जाता हैं।

11. शंखपुष्पी (शंखाहूली) : शंखाहूली, ब्राह्मी और अम्बर को शहद के साथ मिलाकर उन्माद के रोगी को चटाने से उन्माद या पागलपन दूर होता है।
लगभग 40 ग्राम शंखपुष्पी चूर्ण और 1 ग्राम कड़वी कूट के चूर्ण को मिश्री के साथ मिलाकर प्रतिदिन पिलाने से पागलपन ठीक हो जाता है।
लगभग 10 ग्राम शंखपुष्पी, 110 कालीमिर्च, 7 बादाम की गिरी और 6 ग्राम पेठे की मींगी को ठंड़ाई की तरह घोटकर पागलपन के रोगी को एक महीने तक देने से रोग ठीक होता है।
ताजा शंखपुष्पी के 20 मिलीलीटर पंचांग का रस चार चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन कराने से बहुत लाभ मिलता है।

12. पेठा : पेठे के बीजों का चूर्ण लगभग आधा ग्राम और आधा ग्राम कूठ का चूर्ण को 5 ग्राम शहद के साथ मिलाकर चटाने से पागलपन या उन्माद का रोग खत्म होता है।
पेठा, शंखाहूली और ब्राह्मी को गाय के कच्चे दूध के साथ मिलाकर रोगी को पिलाने से उन्माद या पागलपन दूर होता है।
लगभग 28 से 112 मिलीलीटर पेठे का रस पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।

13. बच : लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में बच, सिरस के फूल, मजीठ, पीपल, सरसों, हल्दी और सोंठ को पीसकर बकरे के पेशाब में मिलाकर चने के आकार की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। 1-1 गोली पागलपन से पीड़ित व्यक्ति को एक गोली पानी में पीसकर आंखों में लगाने से रोग ठीक होता है।
बच, ग्वारपाठे का रस और ब्राह्मी को पेठे के रस में मिलाकर पीने से पागलपन खत्म होता है।

14. फिटकरी : लगभग 3 ग्राम फिटकरी में 250 ग्राम मक्खन मिलाकर रोगी को खिलाने से उन्माद या पागलपन खत्म हो जाता है।
लगभग 1-1 ग्राम भुनी हुई फिटकरी को दूध के साथ सुबह- शाम लेने से पागलपन या उन्माद खत्म हो जाता है।

15. नारियल : कच्चे नारियल का पानी दिन में 2 बार देने से पागलपन का रोग में लाभ मिलता है।

16. सर्पगंधा (असरोल बूटी) : एक ग्राम पानी में सर्पगंधा की जड़ को कूटकर सुबह-शाम रोगी को देने और ऊपर से मिश्री मिले 250 मिलीलीटर बकरी का दूध पिलाना चाहिए। इससे जोश के कारण हुआ मानसिक पागलपन ठीक हो जाता है।
लगभग 10 से 20 ग्राम की मात्रा में छोटी चंदन (सर्पगंधा) के फल के चूर्ण को दिन में 2 बार देने से नींद आती है और पागलपन खत्म हो जाता है।
लगभग 2 ग्राम सर्पगंधा और 5 कालीमिर्च का चूर्ण बनाकर सुबह-शाम बकरी के दूध के साथ पागलपन के रोगी को पिलाने से रोग ठीक होता है। इसका इस्तेमाल करते समय दिनों में रोगी के सिर पर बादाम रोगन की मालिश करें और गर्म वस्तु रोगी को खिलाना चाहिए।
लगभग 3 ग्राम की मात्रा में सर्पगंधा की जड़ को 50 ग्राम गुलाबजल में रात को भिगो दें और सुबह इस मिश्रण को छानकर रोगी को पिलाएं। इससे उन्माद या पागलपन में बहुत लाभ मिलता है।

17. अकीक : लगभग आधे ग्राम की मात्रा में अकीक भस्म (राख) को शहद मिलाकर सुबह-शाम पागलपन से पीड़ित रोगी को खिलाने से पागलपन दूर होता है।

18. धनिया : लगभग 10 से 20 ग्राम धनिये का चूर्ण सुबह-शाम पागलपन के रोगी को देने से संभोग की वजह से उत्पन्न पागलपन ठीक हो जाता है।

19. धतूरा : काले धतूरे के शुद्ध बीजों को पित्तपापड़ा के रस में घोंटकर पीने से मानसिक उन्माद शान्त होता है।
शुद्ध धतूरा के बीज और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर महीन करके पानी के साथ खरल करके एक चौथाई ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1 या 2 गोली सुबह-शाम मक्खन के साथ रोगी को देने से मानसिक उन्माद समाप्त होता है।

20. हल्दी : हल्दी का धुंआ भूतोन्माद के रोगी को सुंघाने से लाभ मिलता है।

21. नींबू : नींबू के बीजों को धूप में सुखाकर रोगी के तकिये के नीचे रखने से रोगी का दिमाग शान्त रहता है और पागलपन दूर हो जाता है।
नींबू के रस से पागलपन से पीड़ित रोगी के सिर पर मालिश करने से पागलपन खत्म हो जाता है।
नींबू के छिलके का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन 5 ग्राम की मात्रा में 200 मिलीलीटर पानी में डालकर रोगी को देने से पागलपन ठीक होता है।
बिजौरा नींबू, नीम और निर्गुन्डी का रस मिलाकर 3 दिन तक रोगी को सुंघाने से पागलपन के साथ उत्पन्न मिर्गी के दौरे समाप्त हो जाता है।

22. गिलोय : गिलोय के काढ़े को ब्राह्मी के साथ पीने से उन्माद या पागलपन दूर हो जाता है।

23. सफेद पेठा : पागलपन के रोग से पीड़ित रोगी की आंखें लाल हो जाए और नाड़ी की गति तेज हो जाए तो रोगी को पेठे का एक गिलास रस पिलाना चाहिए।

24. ताड़ : ताड़ के पेड़ की छाल का रस पागलपन के रोगी को पिलाने से उन्माद या पागलपन दूर होता है।

25. सरसों का तेल : पागलपन के रोग से पीड़ित रोगी को सरसों का तेल सुंघाने और सिर पर मालिश करने से पागलपन दूर होता है।

26. बेल : पागलपन के रोगी को बेल की जड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पिलाने से हृदय की तेज धड़कन सामान्य बनती है और पागलपन दूर होता है।

27. मुर्गा : मुर्गा के बालों को जलाकर नाक में उसका धुंआ देने से पागलपन ठीक होता है।

28. पारा : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पारे की भस्म (राख) को गाय के मक्खन के साथ मिलाकर पागलपन के रोगी को खिलाने से लाभ होता है।

29. कायफल : कायफल, तिल का तेल और करंजवा को मिलाकर उन्माद के रोगी की नाक में डालने से पागलपन दूर हो जाता है।

30. रेवन्दचीनी : रेवन्दचीनी को पानी में पीसकर बादी के पागलपन से पीड़ित व्यक्ति के दोनों कंधों के बीच में लेप करने से पागलपन दूर हो जाता है।

31. खस : खस के रस में चीनी मिलाकर पिलाने से गर्मी के कारण हुआ पागलपन ठीक हो जाता है।

32. चम्पा के फूल : चम्पा के 4 ताजे फूल को 20 ग्राम शहद में पीसकर रोगी को चटाने से पित्त के कारण हुआ पागलपन ठीक होता है।

33. शहतूत : शहतूत के शर्बत के साथ ब्राह्मी को मिलाकर पागलपन के रोगी को देने से गर्मी के कारण हुआ पागलपन दूर हो जाता है।

34. सेब : सेब के शर्बत में ब्राह्मी का चूर्ण मिलाकर पागलपन के रोगी को पिलाने से गर्मी के कारण हुआ पागलपन ठीक हो जाता है।

35. अफीम : पागलपन के रोग से पीड़ित रोगी को अफीम थोड़ी मात्रा में खिलाने से घबराहट दूर होती है।

36. हरसिंगार : गर्मी की घबराहट को दूर करने के लिए हरसिंगार के सफेद फूलों का गुलकन्द सेवन करना चाहिए।

37. तेजपत्ता : तेजपत्ते को पानी के साथ पकाकर खाने से सर्दी के कारण हुआ पागलपन दूर हो जाता है।

38. खिरैंटी : लगभग 35 ग्राम सफेद फूल वाली खिरैंटी का चूर्ण और लगभग 10 ग्राम पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण को दूध में पकाकर ठंड़ा करके सुबह पीने से पुराना पागलपन भी ठीक होता है।

39. लहसुन : लहसुन का रस, तगर, सिरस के बीज, मुलहठी और बच बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें और इस चूर्ण को आंखों में लगाने और सूंघने से पागलपन व मानसिक उन्माद नष्ट होता है।

40. शहद : लगभग आधा ग्राम शहद के साथ 40 मिलीलीटर ब्राह्मी के पत्तों का रस और लगभग आधा ग्राम कूट का चूर्ण मिलाकर पीने से पागलपन खत्म हो जाता है।
शहद के साथ 10 मिलीलीटर ब्राह्मी के पत्तों के रस और 3 ग्राम कुलिंजन का चूर्ण मिलाकर दिन में 3 बार उन्माद के रोगी को चटाने से लाभ होता है।

41. खसखस : 5 ग्राम खसखस, 5 ग्राम कद्दू की मींगी और 15 दाने किशमिश को घोटकर रोगी को एक बार खिलाने से एक महीने में रोग समाप्त हो जाता है।

42. दूध : लगभग 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ 2 लाल रंग की घुंघची का चूर्ण कुछ दिनों तक लगातार खिलाने से बलगम के कारण होने वाला पागलपन ठीक होता है।

43. मूत्र : लगभग 100 से 200 मिलीलीटर गाय के पेशाब को छानकर एक महीने तक रोगी को पिलाने से पागलपन ठीक हो जाता है।

44. गन्ना : गन्ने का रस और दूध बराबर मात्रा में लेकर इसमें लगभग 2 से 3 ग्राम कुटकी का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम रोगी को देने से पागलपन ठीक हो जाता है।

45. गुड़हल (अड़हुल) : लगभग 10 से 12 गुड़हल के फूलों को पीसकर सुबह-शाम पागलपन के रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

46. वन्यकाहू : लगभग 1 से 3 ग्राम वन्यकाहू के बीजों का सेवन करने से कामवासना में कमी आती है और संभोग या कामोन्माद ठीक हो जाता है।

47. बान्दा (बांझी) : लगभग 10 से 20 मिलीलीटर बान्दा (बांझी) के फूलों का रस सुबह-शाम सेवन करने से उन्माद या पागलपन ठीक हो जाता है।

48. कपूर : यदि किसी स्त्री में काम इच्छा के कारण पागलपन उत्पन्न हुआ हो तो उसे आधा ग्राम कपूर का सेवन कराना चाहिए। इससे स्त्री में कामवासन से उत्पन्न पागलपन ठीक हो जाता है।

49. पोस्ता : प्रतिदिन नियमित रूप से पोस्ता का काढ़ा पागलपन के रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।

50. बादाम : आठ गिरी बादाम प्रतिदिन रात को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह बादाम के छिलके उतारकर उसी पानी के साथ पीसकर 200 मिलीलीटर दूध के साथ उन्माद के रोगी को पिलाएं। इससे पागलपन दूर हो जाता है और मस्तिष्क संतुलित रहता है।

51. एरण्ड : लगभग 20 मिलीलीटर एरण्ड के तेल को दूध के साथ रात को सोते समय रोगी को पिलाने से कब्ज नष्ट होती है और पागलपन के लक्षण समाप्त होते हैं।

52. कपास : लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में कपास के फूल और गुलाबजल को पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें और इसमें 20 ग्राम गुड़ डालकर चाशनी बना लें। यह चाशनी 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से पागलपन रोग ठीक हो जाता है। ]

53. नीम : लगभग 6 ग्राम नीम के पत्तों का रस और लगभग 2 ग्राम कूठ के चूर्ण को शहद में मिलाकर पागलपन या उन्माद के रोगी को चटाने से लाभ मिलता है।

54. सौंफ : 500 मिलीलीटर पानी में 10 ग्राम सौंफ को उबालें और जब पानी 250 मिलीलीटर की मात्रा में शेष रह जाए तो इसे छानकर रख लें। यह 10 मिलीलीटर काढ़ा मिश्री मिलाकर पागलपन के रोगी को पिलाने से रोग ठीक होता है।

55. इमली : लगभग 20 ग्राम इमली को पानी के साथ पीसकर छानकर पागलपन के रोगी को पिलाने से पागलपन या उन्माद दूर होता है।

56. चंदन : लगभग 3 ग्राम सफेद चंदन के चूरे को 50 मिलीलीटर गुलाबजल में शाम को डालकर रख दें। सुबह इसको उबालकर छानकर मिश्री मिलाकर चाशनी बना लें। इस चाशनी को पागलपन या उन्माद के रोगी को खिलाने से यह रोग ठीक हो जाता है।