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यह कहानी पढ़कर मेरी आँखों में आंशु आ गए - कमजोर दिल वाले ना पढ़ें - Dil ko hila dene wali dard bhari kahani

यह कहानी पढ़कर मेरी आँखों में आंशु आ गए - कमजोर दिल वाले ना पढ़ें - Dil ko hila dene wali dard bhari kahani - samaaj ko badlane ki bahut jarurat hai - दोस्तों आज इन्टरनेट पर एक ऐसी कहानी पढ़ने लगा जिसे पढ़ते - पढ़ते मेरी आँखों में आंशु आ गए. जिसके साथ ये सब होता है उसका हाल मैंने महशुश किया. दोस्तों जिन्दगी में ना जाने कब कैसा दिन देखना पड़ जाएँ इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है. इस बारे में यह कहानी पढ़कर जानिये...


कहानी इस प्रकार है - 

एक 5 - 6 साल का मासूम - सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर मंदिर के एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था। कपड़े में मैल लगा हुआ था मगर निहायत साफ, उसके नन्हे - नन्हे से गाल आँसूओं से भीग चुके थे। बहुत लोग उसकी तरफ आकर्षित थे और वह बिल्कुल अनजान अपने भगवान से बातों में लगा हुआ था।

जैसे ही वह उठा एक अजनबी ने बढ़कर उसका नन्हा - सा हाथ पकड़ा और पूछा : - "क्या मांगा भगवान से"..

बच्चे ने कहा : - "मेरे पापा मर गए हैं उनके लिए स्वर्ग, मेरी माँ रोती रहती है उनके लिए सब्र, मेरी बहन मेरी माँ से कपडे सामान मांगती है उसके लिए पैसे"।

उस आदमी ने  फिर पूछा - "तुम स्कूल जाते हो?" (अजनबी का सवाल स्वाभाविक - सा सवाल था।)

बच्चे ने कहा : - हाँ जाता हूँ।

उस आदमी ने  फिर पूछा - किस क्लास में पढ़ते हो?

बच्चे ने कहा : - नहीं अंकल पढ़ने नहीं जाता, मां चने बना देती है वह स्कूल के बच्चों को बेचता हूँ। बहुत सारे बच्चे मुझसे चने खरीदते हैं, हमारा यही काम - धंधा है।

बच्चे का एक एक शब्द मेरी रूह में उतर रहा था ।

उस आदमी ने  फिर पूछा - "तुम्हारा कोई रिश्तेदार है"

बच्चे ने कहा : - पता नहीं, माँ कहती है गरीब का कोई रिश्तेदार नहीं होता है। मेरी माँ झूठ नहीं बोलती, ... पर अंकल, मुझे लगता है मेरी माँ कभी कभी झूठ बोलती है, जब हम खाना खाते हैं हमें देखती रहती है...   जब कहता हूँ - माँ तुम भी खाओ, तो कहती है मैने खा लिया था, उस समय लगता है झूठ बोलती है।

उस आदमी ने कहा - बेटा अगर तुम्हारे घर का खर्च मिल जाए तो पढाई करोगे ?

बच्चे ने कहा : - "बिल्कुलु नहीं"

उस आदमी ने  फिर पूछा - "क्यों"

बच्चे ने कहा : - पढ़ाई करने वाले, गरीबों से नफरत करते हैं अंकल, हमें किसी पढ़े हुए ने कभी नहीं पूछा, बस पास से गुजर जाते हैं।

यह सुनकर अजनबी हैरान भी था और शर्मिंदा भी।

बच्चे ने कहा : - "हर दिन इस मंदिर में आता हूँ, कभी किसी ने नहीं पूछा - यहाँ सब आने वाले मेरे पिताजी को जानते थे - मगर हमें कोई नहीं जानता।

यह कहकर बच्चा जोर-जोर से रोने लगा और बोला - अंकल जब बाप मर जाता है तो सब अजनबी क्यों हो जाते हैं?

उस आदमी के पास इसका कोई जवाब नही था, उस बच्चे के सवाल का जवाब देना मुश्किल भी था। ऐसे कितने मासूम होंगे जो हसरतों से घायल हैं। बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतीमों, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए ..... मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस - पास किसी गरीब को देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो।

इसे पढके यदि आपको लगे कि देश में मदद करने वालों कि ज्यादा जरूरत है तो सब काम छोडकर ये मेसेज कम से कम दो गुरुप मे जरुर डाल दीजिये। शायद किसी ग्रुप में कोई ऐसा देवता इन्सान मिल जाएँ जो ऐसे बच्चों का भगवान बन जाए।

क्या आपने कभी किसी गरीब बेसहारा की आँखों मे आँखें डालकर देखा है? यदि नहीं तो अब देखिये... आपको क्या महसूस होता है उसे समझिये। अब तक आपने बहुत से फोटो या विडियो भेजे होंगे लेकिन आज ये पोस्ट कम से कम एक या दो गुरुप मे जरुर डाले और यदि हो सके तो अपने सभी groups में भेजिये।

दोस्तों अक्सर ऐसे लोग आपने देखें होंगे जो कहते है कि - "हम 2 - 4 के बदलने से समाज नहीं बदलेगा"। दोस्तों यदि आपने ये सोचकर हार मान ली तो समाज कैसे बदलेगा। दोस्तों बिना कोशिश किए ही आपने निर्णय ले लिया. एक बार कोशिश तो करके देखिये। समाज जरुर बदलेगा सबसे पहले आप अपने आपको बदल लीजिये।

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