हम तो मान चुके है दिल से दोस्त तुम्हें, ये राज ज्यादा देर तक छुपाना ठीक नही

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अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता!
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता!
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का!
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता!
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तुम्हारे नाम को होंठों पर सजाया है मैंने!
तुम्हारी रूह को अपने दिल में बसाया है मैंने!
दुनिया आपको ढूंढते ढूंढते हो जायेगी पागल!
दिल के ऐसे कोने में छुपाया है मैंने!
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जब तक तुम्हें न देखूं!
दिल को करार नहीं आता!
अगर किसी गैर के साथ देखूं!
तो फिर सहा नहीं जाता!
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यूँ नज़रें झुका कर मुस्कुराना ठीक नहीं,
दिल की बात दिल में दबाना ठीक नही,
हम तो मान चुके है दिल से दोस्त तुम्हें,
ये राज ज्यादा देर तक छुपाना ठीक नही...

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