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गाम्मां की छोरियां की दिनचर्या पै एक हरयाणवी चुटकुला - Gaama ki chhoriyan ki dinchrya pe ek haryanvi chutkula

गाम्मां की छोरियां की दिनचर्या पै एक हरयाणवी चुटकुला - Gaama ki chhoriyan ki dinchrya pe ek haryanvi chutkula - गामा की कई छोरी कट्ठी ओकै आर योजना बना कै बाजार मैं जावैगी. मंडी में रिक्सा मैं तै उतर्तियें सबते पहल्या इन्है कुछ खाण खातर चहिये इसलिए सीधी गोलगप्पयां की रेड़ी टोवैगी.

फेर इनमे जो सबते modren होगी वा गोलगप्या आल़ा धोरे जावैगी अर आधी english आर आधी हिंदी मै कवैगी - भैया भैया... Five rupees के गोलगप्पे देना... और please उस पानी को थोड़ा "गिचौल " लेणा.

फेर मंडी में गुमाई-फिराई करैंगी. तडके तै सांझ ताई सारी मंडी न छड़ कै आखिर मै 300 रूपए आळी जीन्स और 150 रुपया का सुरड़ा होया टॉप ले कै लिक्ड़ेंगी. 

फेर चालती हाण उनमे ते एक कवैगी - 'सिट्ट यार आज का तो पूरा दिन "घुल " गया'.
दूसरी कवैगी - 'मेरे तो गोडों में भी pain शुरू हो गया...
उनकी सुन के तीसरी की भी कवैगी - " हाँ यार मेरी भी "पिंडी' भड़क " रही हैं .

आर फेर नए समस्टर के पहले दिन जीन्स पहर कै क्लास में जावेंगी ... आर भरी क्लास में जब lacture चाल रया होगा, एक दम किलकी मारैगी " ohh माई godd !! मेरी pent पे "भूण्ड" !! 
दूसरी कवैगी... " तुझे लड़ा तो नहीं है "
फेर तीसरी मुंह चिकड़ा कै कवैगी - " ये 'भूण्ड' तो इस दुनिया में होने ही नहीं चाहिए.. इनको sense ही नहीं है...

Only for fun...