कितना नुकशानदायक है बैठे बैठे पैर हिलाना - आइये जाने - Kitna nukshandayak hai baithe baithe pair hilana - aaiye jankari lijiye

कितना नुकशानदायक है बैठे बैठे पैर हिलाना - आइये जाने - Kitna nukshandayak hai baithe baithe pair hilana - aaiye jankari lijiye - प्रिय मित्र, आपने देखा होगा कि बहुत से लोगों कि बैठे पैर हिलाने की आदत होती है. मगर क्या कभी आपने सोचा है कि वो लोग ऐसा क्यों करते है? क्या ऐसा करना ठीक है? कहीं ये किसी अनहोनी का संकेत तो नहीं है? क्या होगा यदि यह आदत छुट नहीं पाई?


आप किसी मीटिंग में बैठे हैं और कुर्सी पर बैठे-बैठे आप लगातार अपने पैर हिलाने में व्यस्त हैं. किसी दोस्त के साथ पब में हैं और काउच पर बैठे हुए आप अपने पैर को हिलाते जा रहे हैं. ब्यूटी पार्लर में अपने बाल कटवा रही हैं और आपको आपकी ब्यूटिशियन बार-बार टोक रही है कि आप पैर मत हिलाइए, लेकिन हैरानी की बात है आपको पता भी नहीं चला कि आप अपना पैर हिला रही हैं.

बहुत से लोग होते हैं जिन्हें एक स्थान पर बैठे हुए पैर हिलाने की आदत होती है. यह आदत इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि कई बार तो पता ही नहीं चलता कि पैर हिलाने का यह सिलसिला कब शुरू हो जाता है, जब दूसरे आपको टोकते हैं तब आपको पता चलता है कि आप तो बैठे-बैठे अपने पांव हिला रहे थे. ये आदत बचपन से आपके साथ चलती है और समय बीतने के साथ-साथ यह और ज्यादा पढ़ जाती है.

आप सोचते हैं यह तो आपकी बचपन की आदत है यहां तक कि परिवारवाले भी आपको एक समय बाद डांटना बंद कर देते हैं यह कहकर कि “इसकी ये आदत नहीं छूटेगी” लेकिन इस बारे में विशेषज्ञों की राय कुछ अलग है. हालिया शोध के बाद डॉक्टरों का कहना है कि यह आदत से ज्यादा एक बीमारी का संकेत है जो आगे चलकर गंभीर परिणाम पैदा करता है.

हावर्ड मेडिकल स्कूल, बोस्टन के प्रोफेसर और इस शोध के मुखिया डॉ. डब्ल्यू, विंकमैन का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति औसतन नींद ना आने से पहले 200-300 बार अपने पैर हिलाता है. शोधकर्ताओं का यह स्पष्ट कहना है कि लगातार पैर हिलाने जैसी बीमारी से दिल का दौरा पड़ने की संभावना तो तेज होती ही है लेकिन साथ ही हृदय संबंधित अन्य बीमारियां भी व्यक्ति को घेर लेती हैं.

मेडिकल साइंस में रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम के नाम से कुख्यात इस बीमारी का कारण नींद ना आना है. जब व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान होता है या बचपन से ही उसे नींद ना आने की बीमारी है तो कुछ समय बाद वह रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की चपेट में चला ही जाता है. इस बीमारी से ग्रस्त लोगों को कार्डियोवैस्कुलर संबंधित बीमारियां अपना शिकार बना लेती हैं और लगातार पैर हिलाते रहने से ब्लड प्रेशर के साथ-साथ दिल की धड़कनों की गति भी बढ़ जाती है, जिसकी वजह से आगे चलकर जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है.

अब बस इस वजह से यह सोच लेना कि यह शोध विदेशी पृष्ठभूमि पर आधारित है इसीलिए भारत में इसका कोई खास महत्व नहीं है गलत होगा. कभी-कभी विदेशी शोधकर्ता भी कुछ काम लायक शोध कर ही लेते हैं. वैसे भी पैर हिलाना अच्छी आदत तो है नहीं इसीलिए अगर आप ऐसा करते हैं तो जल्द से जल्द इस आदत से छुटकारा पाइए, यही आपकी सेहत के लिए अच्छा होगा.

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