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गर्भवती महिला को यह काम भूलकर भी नहीं करना चाहिए - Garbhvati mahila rakhen yah sadhani

हर औरत की इच्छा यहीं होती है कि वो माँ बने. जिन औरतों को माँ बनना नशीब नहीं होता है उन्हें उम्रभर दुनियां के अनेक ताने सहने पड़ते है. गर्भवती महिला को गर्भधारण करने से लेकर बच्चे के जन्म तक अनेक सावधानियां रखने की जरूरत होती हैं। हमारे यहां बच्चे के जन्म से पहले अनेक ऐसी परंपराएं हैं जिनका गर्भवती महिला को पालन करना पड़ता है। जिससे बच्चे के जन्म के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य रहें।


इन परंपराओं में से एक यह भी है कि गर्भवती महिला को सातवें महीने के बाद नदी और नाले को भूलकर भी पार नहीं करना चाहिए. कई लोगों का मानना है कि इन दिनों में गर्भवती महिला को नदी और नाले के पास भी नहीं जाना चाहिए.

ऐसा माना जाता है कि नदी और नाले जैसे क्षेत्र में नकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है। इसलिए श्मशान भी नदी के किनारे बनाए जाते हैं और ऐसे स्थानों पर ही तंत्र साधना की जाती है। जब कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उसके शरीर में बहुत सारे परिवर्तन होते हैं। उनका शरीर सामान्य से अधिक संवेदनशील होता है।

ऐसे में नदी या नाले को पार करने से या उनके पास जाने से होने वाले बच्चे पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा इसका एक अन्य कारण यह भी है कि एक बार जब गोद भराई करके होने वाले शिशु की मां को मायके भेज दिया जाता है तो वो वहां अच्छे से आराम करे और यात्राएं ना करे ताकि होने वाली संतान स्वस्थ्य हो क्योंकि सातवे महीने के बाद गर्भवती महिलाओं को यात्रा करने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।