छोटी-छोटी बातों में न उलझकर अपना समय बचाएं और मन शांत रखें - Krodh se dur rahen

जब कोई हमारा किसी प्रकार से कुछ अहित कर देता है, तब हमें उस व्यक्ति पर बहुत क्रोध आता है। अहित करने वाले का हम भी अहित करने के लिए सोचना शुरू कर देते हैं। फिर इसी तरह दोनों के बीच दूरी बढ़ती जाती है और एक दिन दोनों आपस में दुश्मन की तरह व्यवहार शुरू कर देते हैं और हम हमारा बहुत सा समय दूसरों का अहित करने में ही बिगाड़ देते हैं।


कई बार किसी से अनजाने में हमारा बुरा हो जाता है, धन का नुकसान हो जाता है या अन्य किसी प्रकार से हमें कष्ट पहुंचा देता है और वह पलट कर क्षमा याचना करता है। परंतु हम हमारे नुकसान से इतने बौखलाए हुए रहते है कि हम उसे भला-बुरा सुना देते हैं।

जवाब में सामने वाला भी चुप नहीं रहता और बस फिर तू-तू, मैं-मैं शुरू हो जाती है। इतनी बात बढ़ाने से अच्छा है किसी भी क्षमा मांगने वाले को तुरंत ही क्षमा कर दिया जाए। इससे हमारे समय की बचत होगी और हमारा मन भी शांत रहेगा। किसी को क्षमा किया जाए जो पूरी तरह मन से क्षमा कर देना चाहिए। ऐसा ना हो कि ऊपर से तो हम उसे क्षमा कर रहे हैं और अंदर ही अंदर उस व्यक्ति से बैर पाल के बैठ जाए और समय आने पर उसका अहित कर दे।

शास्त्रों के अनुसार भी क्षमा करने को एक महान कार्य बताया गया है। अत: कोशिश करें कि किसी की छोटी-छोटी बातों में न उलझकर अपना समय बचाएं और मन शांत रखें।

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