आज भी अंधभक्त इस पाखंडी को अपना भगवान मानते हैं - Baba Ram Rahim

 धर्मगुरु एक ऐसा पवित्र शब्द है जिसको सुनते ही लोग श्रध्दा से अपना सर झुका देते हैं. भगवान तक पहुँचने का माध्यम होते है धर्मगुरु. हमारे देश में धर्मगुरुओं को लोग भगवान तक का दर्जा दे देते हैं, उनकी अंधभक्ति करते हैं, उनके एक इशारे पर मर मिटने और अपना सबकुछ मिटाने तक के लिये तैयार हो जाते हैं.



सभी धर्मों में इस बात पर खासा ज़ोर दिया गया है कि धर्मगुरुओं का सम्मान सर्वोपरी है और होना भी चाहिए. क्योंकि बिना धर्मगुरु के धर्म का पालन करना आसान नहीं है. धर्मगुरु आम इंसान और भगवान के बीच की बेहद अहम् कड़ी माने जाते हैं. जीवन के प्रत्येक अहम् मोड़ पर हमें धर्मगुरु की आवश्यकता पड़ती ही है. जन्म, शादी, मृत्यु कुछ भी हो बिना धर्मगुरुओं की मदद के इन सब से संबंधित धार्मिक क्रिया कलाप को अंजाम देना आसान नहीं होता .

बस कुछ पाखंडी इसी पवित्र पद का गलत फ़ाएदा उठाते हैं और लोगों को गुमराह करके उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं. धार्मिक आस्थाओं के नाम पर भोले भाले लोगों को अपने  जाल में फंसा लेते हैं और उनसे मनमाने काम करवाते रहते हैं.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम भी आस्था के नाम पर ऐसा ही एक घिनौना खेल खेल रहा था जिसके बारे में बताने में भी शर्म आती है. एक ऐसा धर्मगुरु जिसके दुनियाभर में करोड़ो भक्त हैं मगर उसकी असलियत आज सबके सामने है कि  किस तरह वो धर्म की आड़ में मासूम लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता था. इतना ही नहीं और भी कई तरह के संगीन इलज़ाम हैं इस बाबा के ऊपर. मगर आज भी अंधभक्त इसको अपना भगवान मानते हैं.     

 आज सभी को समझना चाहिए की अगर ऐसे ढोंगी बाबाओं का इसी तरह समर्थन किया गया तो इनके हौसले बढ़ते चले जाएँगे. और ये ऐसे ही अपनी मनमानी करते रहेंगे और न जाने कितने लोगों की ज़िंदगियों को बर्बाद करते रहेंगे.

धर्म और धर्मगुरु दोनों हमारे लिये अहम् हैं मगर हमें समझना चाहिए की हमे किस तरह के धर्मगुरुओं का सम्मान करना है और किनका नहीं. कहीं ऐसा तो नहीं जिसको हम धर्मगुरु मान रहे हों वो एक पाखंडी हो और धर्म के नाम पर अधर्म कर रहा हो.

धर्म के नाम पर अपनी दुकान चला रहा हो, दौलत इकट्ठा कर रहा हो. ये सब जानना और समझना हमारी ज़िम्मेदारी है. हमे अंधभक्त नहीं बल्कि एक सच्चा और अच्छा भक्त बनना चाहिए. जिस भगवान की हम भक्ति करते हैं उसी भगवान के हमे अक्ल दी है और हमें उसके द्वारा दी गई इस दौलत का सही इस्तेमाल करना चाहिए. भक्ति सही है पर अंधभक्ति सही नहीं है.

इस लेख का मक़सद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है बल्कि समाज को जागरूक करना है क्योंकि कही ‘राम’ तो कहीं ‘रहीम’ के पवित्र नाम की आड़ में बाबा राम रहीम जैसे बहुत से लोग हमारे सीधे-साधे समाज को गुमराह कर रहे हैं.
                                        (शारिब अब्बास)

एक टिप्पणी भेजें